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राशि प्रभेद

Verse 1.2

भूयोभिः पटुबुद्धिभिः पटुधियां होराफलज्ञप्तये शब्दन्यायसमन्वितेषु बहुशः शास्त्रेषु दृष्टेष्वपि । होरातन्त्र महार्णव प्रतरणे भग्नोद्यमानाम्अहं स्वल्पं वृत्त विचित्रम्अर्थ बहुलं शास्त्र प्लवं प्रारभे

अनुवाद हे तीक्ष्ण बुद्धि वाले विद्वानों, यद्यपि शब्द-न्याय (व्याकरण और तर्क) से युक्त अनेक शास्त्रों को आपने बार-बार देखा है, फिर भी होराफलों को जानने के लिए आपकी इच्छा पूर्ण नहीं हुई है। होरा-तंत्र रूपी महासागर को पार करने में जिनके प्रयास विफल हो गए हैं, उनके लिए मैं अल्प परिमाण वाला, किंतु विचित्र अर्थों से युक्त और शास्त्रों का सार रूपी यह नौका आरंभ कर रहा हूँ।

अर्थ इस श्लोक में वराहमिहिर अपनी रचना 'बृहत्जातक' के उद्देश्य और विनम्रता को व्यक्त करते हैं। वे स्वीकार करते हैं कि पूर्व में अनेक महान ग्रंथ लिखे गए हैं और तीक्ष्ण बुद्धि वाले पंडितों ने उनका अध्ययन भी किया है, परंतु ज्योतिष का समुद्र इतना विशाल और गहन है कि अकेले शास्त्रों के ज्ञान या तार्किक विश्लेषण से उसका पूर्ण पार लगाना कठिन है। अक्सर विद्वान जटिलताओं में उलझकर फलादेश की स्पष्टता तक नहीं पहुँच पाते।

लेखक यहाँ 'शास्त्र प्लव' अर्थात शास्त्रों की नौका की बात कर रहे हैं। उनका दावा नहीं है कि वे कुछ नया आविष्कार कर रहे हैं, बल्कि वे प्राचीन ज्ञान को संक्षिप्त (स्वल्पं वृत्त), किंतु गूढ़ और बहुआयामी अर्थों (विचित्रम् अर्थ बहुलं) से परिपूर्ण करके प्रस्तुत कर रहे हैं। यह प्रयास उन साधकों के लिए है जो विशाल साहित्यिक भंडार में भटक गए हैं और अब एक सरल किंतु सारगर्भित मार्गदर्शक चाहते हैं जो उन्हें जीवन के फलों के रहस्यों तक ले जाए।

चिंतन आज के दिन जब भी आप किसी जटिल समस्या या निर्णय के सामने खड़े हों, तो यह याद रखें कि केवल तर्क या पुस्तकीय ज्ञान ही पर्याप्त नहीं होता। एक क्षण के लिए रुकें और अपने अहंकार या अत्यधिक विश्लेषण को छोड़कर उस सरलतम सत्य की ओर देखें जो हृदय को स्पष्ट दिखाई दे रहा हो। विशाल सागर को पार करने के लिए कभी-कभी भारी जहाज नहीं, बल्कि एक छोटी और हल्की नौका ही अधिक उपयोगी होती है; अपने मन को हल्का रखें और सीधे सार पर ध्यान केंद्रित करें।

A contemplative reading in the spirit of the Jyotish — classical Vedic astrology tradition — an aid to reflection, not a substitute for a living teacher or the classical commentaries.

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