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Prathama Unmesa — Shambhavopaya

Sutra 1.13

इच्छा शक्तिरूमा कुमारी

अनुवाद इच्छा ही वह शक्ति है जो कुमारी (नित्य नवीन और स्वतंत्र) कहलाती है।

अर्थ इस सूत्र में भगवान शिव बताते हैं कि हमारी व्यक्तिगत इच्छा वास्तव में ब्रह्मांडीय चेतना की मूल शक्ति का ही एक रूप है। यहाँ 'कुमारी' शब्द का प्रयोग केवल किसी युवती के लिए नहीं, बल्कि उस अवस्था के लिए किया गया है जो कभी बूढ़ी नहीं होती, जो अतीत के संस्कारों या भविष्य की आशाओं से बंधी नहीं है। यह शक्ति सदैव ताज़ा, स्वतंत्र और पूर्णतः सृजनशील है। जब तक हम अपनी इच्छाओं को सीमित ego की जरूरतें समझते हैं, तब तक हम गुलाम रहते हैं; लेकिन जब हम देख लेते हैं कि यही इच्छा शक्ति परम चेतना की स्पंदन है, तो वह 'कुमारी' बन जाती है—जो हर क्षण नए सिरे से जन्म लेती है।

कश्मीर शैवमत के अनुसार, शम्भवोपाय का मार्ग सीधे इच्छा-शक्ति पर कार्य करता है। सामान्यतः हमारी इच्छाएं वासनाओं और भय से दूषित होती हैं, लेकिन इस सूत्र का दर्शन हमें याद दिलाता है कि इच्छा का मूल स्रोत शुद्ध है। जब साधक यह पहचान लेता है कि 'मैं जो चाह रहा हूँ' वह वास्तव में शिव की ही स्वतंत्र शक्ति (स्वातंत्र्य शक्ति) है, तो इच्छा करने की प्रक्रिया ही ध्यान बन जाती है। इस अवस्था में इच्छा किसी वस्तु को पाने के लिए नहीं, बल्कि अपने ही स्वरूप को अभिव्यक्त करने के लिए उठती है, ठीक वैसे जैसे एक कुमारी बिना किसी अतीत के बोझ के नाचती है।

चिंतन आज के दिन जब भी आपके मन में कोई इच्छा या चाह उठे, चाहे वह चाय पीने की साधारण इच्छा हो या किसी बड़े लक्ष्य की, तो रुककर एक क्षण के लिए उस इच्छा के उद्गम स्थल को देखें। उस इच्छा को दबाने या उसके पीछे भागने के बजाय, यह महसूस करें कि यह इच्छा आपके अंदर एक ताज़ा, नई और स्वतंत्र ऊर्जा की लहर की तरह उठी है। स्वयं से कहें, 'यह मेरी सीमित चाह नहीं, बल्कि शिव की कुमारी शक्ति है जो इस क्षण जागृत हुई है।' इस दृष्टि के साथ उस इच्छा को पूर्ण होने दें, बिना किसी पुराने संस्कार के बोझ के, जैसे एक नदी बिना रुके बहती है।

A contemplative reading in the spirit of the Kashmir Shaivism (Trika / non-dual Tantra) tradition — an aid to reflection, not a substitute for a living teacher or the classical commentaries.

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