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Tritiya Unmesa — Anavopaya

Sutra 3.11

प्रेक्षकाणीन्द्रियाणि

अनुवाद इन्द्रियाँ साक्षी (देखने वाले) हैं।

अर्थ इस सूत्र में शिव की अद्भुत दृष्टि प्रकट होती है जहाँ सामान्य धारणा उलट दी गई है। सांसारिक व्यवहार में हमें लगता है कि 'मैं' शरीर या मन के भीतर बैठा हूँ और इन इन्द्रियों के माध्यम से बाहर की दुनिया को देख रहा हूँ; अर्थात इन्द्रियाँ मेरे उपकरण हैं। किंतु त्रिक दर्शन के अनुसार, वास्तविकता इसके विपरीत है। यहाँ इन्द्रियाँ स्वयं प्रेक्षक बन जाती हैं। इसका तात्पर्य यह है कि चेतना का जो स्वरूप है, वह इन्द्रियों के द्वार पर ही विद्यमान है। जब आप देखते हैं, तो वह 'देखना' कोई व्यक्तिगत कृत्य नहीं, बल्कि शिव की सार्वभौमिक दृष्टि है जो आँखों के रूप में प्रकट हुई है। इन्द्रियाँ निष्क्रिय यंत्र नहीं हैं, बल्कि वे स्वयं चेतना की सक्रिय अभिव्यक्तियाँ हैं जो जगत को अनुभव कर रही हैं।

इसका गहरा तात्विक अर्थ यह है कि देखने वाले और देखे जाने वाले के बीच की खाई मिट जाती है। जब इन्द्रियाँ ही प्रेक्षक हैं, तो उनके पीछे कोई अलग 'मैं' नहीं बचता जो नियंत्रण कर रहा हो। यह अनुभव बताता है कि संवेदन (perception) स्वयं में पूर्ण है। आँख देख रही है, कान सुन रहा है—यह क्रिया किसी पृथक आत्मा की मोहताज नहीं है। यह विश्व की स्पंदनशील चेतना है जो इन्द्रियों के रूप में जागृत होकर स्वयं को ही देख और अनुभव रही है। अतः हर इंद्रिय का कार्य स्वयं शिव का नाटक है, जहाँ विषय और विषयी का भेद विलीन हो जाता है और केवल शुद्ध अनुभव शेष रह जाता है।

चिंतन आज के दिन जब भी आप किसी वस्तु को देखें या किसी ध्वनि को सुनें, तो इस विचार को छोड़ दें कि 'मैं' देख रहा हूँ या 'मैं' सुन रहा हूँ। इसके स्थान पर क्षण भर के लिए ध्यान दें कि 'देखना' स्वयं घटित हो रहा है और 'सुनना' स्वयं प्रवाहित हो रहा है। महसूस करें कि आपकी आँखें या कान कोई निष्क्रिय कैमरा या माइक्रोफोन नहीं हैं, बल्कि वे स्वयं सजग प्रेक्षक हैं। जब कोई दृश्य सामने आए, तो कहें—'यह दृष्टि स्वयं देख रही है', न कि 'मैं देख रहा हूँ'। इस अभ्यास से व्यक्तिगत कर्तृत्व का भार हल्का होगा और आप अनुभव करेंगे कि कैसे चेतना स्वयं इन्द्रियों के द्वार पर नाच रही है।

A contemplative reading in the spirit of the Kashmir Shaivism (Trika / non-dual Tantra) tradition — an aid to reflection, not a substitute for a living teacher or the classical commentaries.

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